
बाबा बंदासिंह बहादुर गुरूद्वारे में मनाई गई गुरू गोबिन्द सिंह जंयती।
नरवाना, 5 जनवरी, :- पंजाबी चौंक स्थित बाबा बंदा सिंह बहादुर गुरूद्वारा में गुरू गोविन्द सिंह जंयती मनाई गई। इस मौके पर गुरूद्वारे में अखंड पाठ, नगरकीर्तन एवं लंगर सेवा का आयोजन किया गया। रागी जत्थे ने गीत भजन प्रस्तुत किए। ग्रंथी भाई बलिहार सिंह द्वारा गुरू ग्रन्थ साहिब का अखंड पाठ किया गया। हजारो लोगों ने अटूट लंगर चखा। चेयरमैन मन्नू छाबड़ा ने बताया यह दिन साहस, बलिदान और खालसा परंपरा की प्रेरणा का प्रतीक है। गुरू गोन्दि सिंह न केवल एक महान आध्यात्मिक गुरु थे, बल्कि एक निर्भीक योद्धा, कवि, दार्शनिक और समाज सुधारक भी थे। उन्होंने अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध खड़े होकर सिख धर्म को संगठित शक्ति प्रदान की और 1699 में खालसा पंथ की स्थापना कर समानता, साहस और आत्मसम्मान का संदेश दिया। उनका जीवन बलिदान, धर्म रक्षा और मानवता की सेवा का जीवंत उदाहरण माना जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी का प्रकाश पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि साहस, त्याग और सत्य के लिए संघर्ष की प्रेरणा का प्रतीक है। यह दिन आने वाली पीढिय़ो को न्याय, मानवता और आत्मबल के मूल्यों से जोडऩे का अवसर प्रदान करता है। इस मौके पर ग्रंथी भाई बलिहार सिंह, प्रधान चरणजीत छाबड़ा, महासचिव बुग्गी दुरेजा, सचिव मांगेराम बतरा, कोषाध्यक्ष अंटू दुरेजा सहित समस्त कार्यकारिणी सदस्यश्रद्वालु मौजूद रहे।









